सच और झूठ
सच और झूठ
किसी पुरूष को
स्त्री का परिधान पहना देने से
वह स्त्री लग सकता है
स्त्री नहीं हो सकता
उसी तरह
झूठ का लबादा ओढ़ाकर
खड़ा कर देने से
सच, झूठ नहीं हो सकता
मात्र
पन्ना और तारीख बदल देने से
इतिहास नहीं बदल सकता।
कहते हैं
किसी जमाने में
ऐसे प्रतापी राजा हुए
जिसके राज में
शेर और बकरी
एक ही घाट का पानी
पिया करते थे
कितना झूठा बोलते हैं रे !
शेर और बकरी
एक ही घाट का पानी
क्यों नहीं पी सकेंगे
अलग-अलग समय पर ?
अरे !
महाप्रतापी तो हम हैं
जहाँ
योगी और भोगी
डॉक्टर और रोगी
मंत्री और संतरी
दलाल और हमाल
हवाली और सवाली
रक्षक और भक्षक
चोर और सिपाही
बनावटी, मिलावटी और सजावटी
शराफत की एक ही मेज पर
एक ही समय पर
एक ही साथ
एक ही ब्राण्ड का पानी
मिल-बैठकर, बाँटकर
गटकते हैं
वह भी चखने और चुहलबाजी के साथ।
धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346
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