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आओ हम सब मूरख

मिलकर

 कोई एक

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जो भर सके पेट

काटकर निवाला

अपने-अपनो का

अपनो को

बाँट सके जो

धूप - छाँव

हवा - पानी

बादल - बारिश

देश - दुनियाँ

बखत परे

साँसे भी।



धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346


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