व्यवस्था
व्यवस्था व्यवस्था से आज तक लड़कर कोई नहीं जीता। व्यवस्था के शब्दकोष में हार शब्द ही नहीं लिखा है। किसी भी युद्ध को लड़़ने के लिए हौसला, हुनर और हथियार की आवश्यकता होती है इन तीनों में से कुछ भी नहीं है तुम्हारे पास। हथियारों की कमी नहीं है किन्तु आज तक हौसले और हुनर से तुम्हारी जमी नहीं है। चलो ! हुनर सीख भी लोगे तो हौसला कहाँ से लाओगे ? हौसले के बिना कोई भी लड़ाई जीती नहीं जा सकती तुम्हारे पास तो वही नहीं है। हौसले तुम लेकर तो आओ हुनर मैं सिखाऊँगा तुम्हे वो हुनर जो किसी गुरूकुल में नहीं सिखाया जाता नहीं बताया जाता किसी कान्वेंट स्कूल में बस, तुम्हे ढाल दिया जाता है कान्वेंट कल्चर में। तुम्हे सिर्फ इतना करना है कान्वेंट कल्चर के खिलाफ गुरूकुल की रैली में सम्मिलित हो जाना है दरअसल व्यवस्था से बड़ा तुर्रम-खाँ कोई नहीं हुआ इस दुनिया में बड़े बड़े टेपाचंद हुए वे रास्ते से हटा दिए गए या सटा लिए गए व्यवस्था के साथ व्यवस्था के लिए और रख लिए गए तोप में बारूद बनाकर तुम्हे भी वह...