नदी का पुल और नौकरशाह

 नदी का पुल और नौकरशाह


नदी पर बना

जमाने का पुल 

जुन्ना और बौना है

किन्तु मनोबल ऊँचा है

काया बूढ़ा गयी है

किन्तु हाँफ जरा भी नहीं रहा।

आँधियाँ आयी

थक-हारकर चली गयी

बाढ़ आयी

कीचड़, गर्दे, गादें आदि

लाद-ओढ़ाकर चली गयी

आत्मविश्वास इतना

कि हर परिस्थिति में खड़ा रहा

अडिग मुस्कुराता

किन्तु 

परदुख सरिस आनन्द नहिं भाई

मंत्र का जाप करने वालों के देश में

मुस्कुराना भी

किसी उन्माद से कतई कम नहीं होता

सो किसी न किसी की आँखों में तो 

खटकना ही था

वैसे भी जुन्ने, बौने और सँकरे

होने के कारण वह

वतनशाहों, वेतनशाहों और कमीशनशाहों

सबकी आँखों में

किरकिरी सा घुसड़ गया था 

गौरवपथ की शुद्ध और परिष्कृत हवा खा-खाकर

वे फुलकर कुप्पा जो हो गए थे

दोपायों पर पैदलमार्च करने वाले

चौपायों का प्रयोग जो करने लगे थे

ऐसे में जुन्ना, बौना और सँकरा पुल

क्यों भाएगा भला ?

नए युग के उच्चमहत्वाकांक्षी और विस्तारवादियों को

इसी का परिणाम है सदानीरा

शिवनाथ की छाती पर

नए जमाने का नया पुल

अजोड़ नौकरशाही का बेजोड़ नमूना

एक जुन्ना पुल है

अटूट मेहनत, कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी का प्रतीक

सावन आया

बादल घुमड़े

वर्षा आयी

बाढ़ आयी

जब बाढ़ का पानी उतरा

कीचड़, गर्दे, गादें लादे

मुस्कुरा रहा था जुन्ना पुल

अडिग आत्मविश्वास और पूरे मनोयोग से

और जीवन्त नौकरशाही का नायाब नमूना

नया पुल ?

नेस्तानाबूद नए पुल के मलबे पर

नायाब, नमूने और नंगे

डूबे हुए हैं निर्लज्ज नौकरशाह

इसी विचार, प्रयत्न और उधेड़बुन में

कि अपनी लाज उघड़ने-उघाड़ने के प्रतिफलस्वरूप

कब, कहाँ, कैसे

किसको 

और कितना निचोड़ा जा सकता है।

 

धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346


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