चिड़िया

 चिड़िया

बेबस लाचार और हैरान

थामना चाहती है शाखें

पूरे इत्मिनान से

जिद पर इच्छाएँ

रचे, बसे, चहके मगर

निगाहो-सी निगाहों में

टिक नहीं पाती शाखें

हवाओं की उग आयी है पाँखे

हो चली है तेज

गतियाँ - मतियाँ।





धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346

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