श्रद्धा
श्रद्धा
नहीं डालता मैं पानी
सोचकर कि देवता हैं
बस एक लालसा
पुरखों की मेरे
मेरी
पीढ़ी के प्रति
देता युगों-युगों रहे
प्राण, दवा, शान्ति
बहाना मात्र है पाषाणमूर्ति
जिंदा रखने के लिए
इस विशाल वृक्ष को
धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346
श्रद्धा
नहीं डालता मैं पानी
सोचकर कि देवता हैं
बस एक लालसा
पुरखों की मेरे
मेरी
पीढ़ी के प्रति
देता युगों-युगों रहे
प्राण, दवा, शान्ति
बहाना मात्र है पाषाणमूर्ति
जिंदा रखने के लिए
इस विशाल वृक्ष को
धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346
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