घरघुंदिया
घरघुंदिया
आकाश में जैसे नहीं होती कोई
पतंग की बिसात
गच्चा खा जाता
सुख, संसार स्वर्ग तेरे घरघुंदिये से
बँधा मेमने सा मिमियाता खड़ा रहता
किसी कोने में
सुन ठक्क होते पाँव
गीत संगीत के
गुनगुनाती गीत कोई जब तू
मीत्थी मीत्थी छी प्याली प्याली छी।
तेरे घरघुंदिये को बाँधने का प्रयास
मतलब साधारण के आगे
असाधारण का चुरचुराना है हारकर
मजाल !
न झुके नजर कोई तेरी ओर
न तरसे तेरे साथ खेलने को
बड़े से बड़ा आदमी घरघुदिये में।
ओह ! मेरी बिटिया
काश ! तुम्हे दे पाता
तेरा घरघुंदिया
जब तुम घर बसाने जाती।
धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346
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