आहवान
आहवान
तुम आओ मेरे साथ
नहीं बनाऊँगा
गौतम, गाँधी, भगतसिंग, आजाद
नहीं सुनाऊँगा
गीता, बाइबिल या कुरान
न ही कोई उपदेश
मैं सिखाऊँगा प्रेम
आत्मा परमात्मा के प्रति नहीं
प्राणीमात्र के प्रति
बनाऊँगा परिवार, समाज, देशहित आदमी
नहीं बनने दूँगा
दोपाया जानवर तुमहे।
धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346
Comments