हौसले
हौसले
पहले भी था, है और रहेगा
बाँध न पायेगी स्वार्थी जंजीरे
धर्म की दीवारें
और तुम्हारा काका परमाणु बम
हम तो लगायेंगे नारे
जिंदाबाद के
मुर्दाबाद के
लाठियाँ चलाओ चाहे गोलियाँ बरसाओ
देखते हैं परिणाम
मारो, मारो जी भर कर मारो
हौसले गरीबी के
बुलंद है यारों।
धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346
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