इस छोटे से कमरे में

 इस छोटे से कमरे में

सब कुछ सकेल ले गये हो

तुम

भावनाओं की भूख

प्यास आँखों की

मिटे

ऐसा कुछ भी तो नहीं

इस छोटे से कमरे में।


नन्हीं गर्म चुलबुली धूप

खिड़की से कूद मेरे गालों पर 

खेलती है गौरैया सी

गुदगुदाते मुस्कुराते कहती 

गोया - गुडमार्निंग !

तुम मुझसे

सटे

इस छोटे से कमरे में।

कहीं जाने से पहले खींचकर दर्पण

बिलकुल तुम्हारी तरह तलाशता है

मेरे चेहरे पर सिंदूर के धब्बे, कहीं बिंदी

चैक जाते हैं कभी

केश, कमीज पर देख मेरे ही

टूटे

इस छोटे से कमरे में।

तेरे रूप रस से भीनी अजीब गंध 

बिखर बिस्तर पर  

बिखेर सपनों के संग

तुम्हारी तरह करीब और करीब

मुझे रखना चाहते हैं नींद से दूर

छूटे

इस छोटे से कमरे में।

दरवाजे के आजू -  बाजू लटकाये

जो तूने ग्रीटिंग कार्डों को जोड़ - जोड़

लटक रहा तुम्हारी बाली से 

जैसे मुस्कुरा कर 

कर रहीं तुम स्वागत

झूमर तेरी नथनी मेरी नाक पर 

अब -तब

डटे

इस छोटे से कमरे में।


धर्मेन्द्र निर्मल  9406096346


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