उम्मीद
उम्मीद
अभी - अभी
यहाँ से गुजरा एक जानवर
चालीस साल पहले
मेरे पूछे जाने पर कि
कब तक बदल डालोगे दुनियाँ ?
कहा था - ‘यही
कोई आधी सदी लगेगी।’
अब-जब
मैंने जानना चाहा
चालीस साल बाद
उसके आदमी से जानवर में
तब्दील होने का कारण।
मुरझाते मेरी आशा के बिरवे पर
सींचते विश्वास जल
उसने मुस्कुराते हुए कहा - ‘बिरादर ही
बिरादर की भाषा समझता है।’
‘हो न हो
इस दशक के अंत तक बदल जाये
सिर्फ उम्मीद पर तो
कायम है ये दुनियाँ।’
धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346
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