माहौल

 माहौल

खोटे रहे उछल 

फटे रहे चल

दराजें रही मचल

आदमी 

हो गया सवार 

पैसों पर 

संसार 

व्यापार ! व्यापार !! व्यापार !!






धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346

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