निश्चित आयेगी सुबह
निश्चित आयेगी सुबह
रात
भटकता रहा
अंधेरे और सन्नाटे में
मेरा स्वप्न अकेला
बेमन-अमन
नींद तैरती रही
नयन जल पर
उतरने से दूर बहुत दूर
हृदय की गहराईयों तक
मेरी सोच कि
संभव है निश्चित
आयेगी और आयेगी सुबह
कल ही की तरह
लाली लिए
चमचमाते सूरज के संग।।
धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346
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