वातावरण

 वातावरण

सुलगती है

आग 

अंदर ही अंदर 

उपर ही उपर 

उठता धुआँ है

जाने क्या हुआ है

सर्वत्र 

धुआँ ही धुआँ हैं।






धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346

Comments

Popular posts from this blog

जातिवाद

होशियार चुनें

हम और तुम