भावना

 भावना


चारा चोंच में दबाए

भागती है इधर - उधर मुर्गी

दौड़ते हैं

दम लिए दंभ भरे

पीछे - पीछे चूजे

है लगा समान श्रम

कूड़े - करकट कुरेदने में।


यह क्या ?


गटक गयी अकेले


देखा

हैसियत चूजे से बढ़ कर नहीं है

आम आदमी की। 




धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346

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