मन की शांति


मन की शांति

 हिन्दु मुसलमाँ सिक्ख ईसाई 

जैन पारसी बौद्ध

सब है यहाँ

आदमी कोई नहीं


एक बौद्ध हिंदू बना

एक हिंदू ने करा लिया खतना

जिसे बनाया गया जबरन ईसाई

तब तो बुद्ध भगवान हुए

फिर अल्लाह बने

और फिर यीशु माना गया 


सोचता हूँ

सचमुच, रूप बदले होंगे

साझेदारी की होगी

या लड़ रहे होंगे अब तक

अपने-अपने भोग लिए

नाबालिगों की इस लड़ाई में

वे बालिग


गीता बाईबिल कुरान अवेस्ता

पूजे जाते हैं सब

धन्य है वह पेंड़

निस्वार्थ ढला कागज में


एक देह के अंत पर 

एक अल्लाह को प्यारे हुए

एक स्वर्गवासी हुआ

एक का महापरिनिर्वाण 

गोद में

समाया होगा कैसे

धरती जाने

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे चर्च

सब ईंट गारे और पत्थर 

स्साली!

शांति मिलती भी है तो 

केवल मन से 

केवल मन को

केवल मन भर।।




धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346


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