दुनियादारी

 दुनियादारी

दुनियादारी -रिष्ते-नाते

मकड़जाल सब 

फँसकर 

टूट

छूट 

टूट-छूटकर 

फँस।






धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346

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