शांति
शांति
जब बहुत परेशान किया
विचारों के घुमड़ते बादल ने
शांति की चाह में
मंदिर की मूर्ति के आगे
सिर नँवाया
तनाव खड़े रहे अड़े
एकांत में गया
बादल बरसने लगे
दुःखों के
भीड़ में ले जाकर
अपने आपको
पाया अकेला बिल्कुल अकेला
शांति सोई मिली
मरघट में
हार कर बैठा निर्विचार
निर्विचार होना था कि
शांति ही नहीं, लगा
मैंने मुक्ति पा ली।।
धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346
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