महान
महान
लोगों ने माँगी रोटियाँ
उसने बाँटी रोटियाँ
बाँटी रोटियाँ छीन सके ताकि
छोड़ दिये
वाचा मानने वाले
कुत्ते।
लोगों ने माँगे कपड़े
उसने ढाँके कंबल ताकि
ढँके कंबल से
देख न सके लोग
काली करतूत
उनकी।
लोगों ने माँगे घर
उसने दिये घर
दिये घर में
दीये की जगह
जलायी बत्तियाँ
उजड़ो को उजाड़कर
फिर से बसाने के लिए।
लोगों ने बजायी तालियाँ
उसने बटोर ली
गंभीर शान से
मुखौटी मुस्कान से
सह ली गालियाँ
यह कहकर कि
जो सहा न
वो महा न
और
हो गए महान।
धर्मेन्द्र निर्मल
9406096346
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