जातिवाद चुम्बक खीचेगा टिन ही क्यों न हो हीरा अमूल्य है चंदन बहुमूल्य क्या लेना क्या देना उसको उसे चाहिए जाति अपनी चुम्बक खीचेगा टिन ही क्यों न हो। धर्मेन्द्र निर्मल 9406096346
होशियार चुनें आओ हम सब मूरख मिलकर कोई एक अधिक होशियार चुनें जो भर सके पेट काटकर निवाला अपने-अपनो का अपनो को बाँट सके जो धूप - छाँव हवा - पानी बादल - बारिश देश - दुनियाँ बखत परे साँसे भी। धर्मेन्द्र निर्मल 9406096346
हम और तुम गाँठे भर आयी है चल चलकर नंगे पाँव पत्थर तोड़ते भर आए हैं मसल। मसलना तो दूर नहीं रहेगा मसलन भी शेष हमारी छूअन मात्र से। मगर, हम हम हैं तुम तुम हो नहीं चल सकते नंगे पाँव तुम डगभर मंदिरो के फर्श पर भी । बस मसलना जानते हो निर्दोष फूलों को तलुआ चाँटते जूतों के नाल से। धर्मेन्द्र निर्मल 9406096346
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