साहसी
साहसी
तुम साहसी हो साहेब
लड़ते नहीं थकते
सोते - जागते
उठते - बैठते
खड़े हो - होकर
बैठने के लिए
समाज से, देश से , जिंदगी से
जिंदगी भर।
जिंदगी से जिंदगी भर
हम लड़ते हैं
बालिश्त पेट के लिए
सो जाते हैं
जब थकते हैं।
धर्मेन्द्र निर्मल
भिलाईनगर 9406096346
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