राखी

 राखी 


आ बाँधू तुम्हे राखी।

बाँधू भैया तुम्हे राखी।।


जीवन किस्मत का पासा है,

सदा रहोगे आशा है, 

सुख दुख में मेरे साथी।।


कदम कहीं डगमग डोले,

कँधे के नीचे आ हौले,

जाओगे बन बैसाखी।।


फँस जाऊँ किसी उलझन में, 

दुनियाँ के विशाल गगन में,

दोगे दिशा दिखा झाँकी।।


बाँध रही हूँ स्नेह पूरित,

करती रहे नित अंकुरित, 

प्रेम  हृदय में राखी।।


कच्चे धागे में भाई, 

सुसज्जित हुई कलाई, 

उर निधि सौगात राखी।।


धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346


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