अभी अभी

अभी अभी


अभी अभी

बहस शुरू हुई है

बस चलने ही वाला है

कोई आंदोलन 

अमल में आने वाली है

कोई नई योजना

फूटने ही वाली है

क्रांति कहीं

बस !

आने ही वाले अच्छे दिन

ऊँची हो रही है नाक

भारत की

एकाग्र-व्यग्र

देश मुँह बाए

ताक रहा है सूरज की ओर

झाँक रहा है

ऊपर - नीचे

दाएं - बाएं

जैसे

अब आये तब आये 

और एक सुकुन पसरे

मगर छींक है कि

आने से रही।

सो रही।


धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346


 

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