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सम्भावनाएं

 सम्भावनाएं सम्भावनाएँ बूढ़ी हो जाती है जवान हो उठती है उदासी आशा जैसे बचपन के दिन खिखियाते बंदर की तरह बार-बार चिढ़ाती है ललमुँही कुण्ठा जाने क्यों ? इसी जगह हो जाता है अडि़यल समय का घोड़ा आदमी खिसियाकर बार-बार मारता है चाबुक असफलता मितवा होना चाहती है कहीं से फूटता है अंकुर लकवाग्रस्त विवेक जूझता है परिस्थितियों से  जैसे पेट से चिलकती धूप में मजबूर-मजदूर मकड़ी हो जाता है धैर्य थक हार-कर भी नहीं टूटता जो तब कहीं बुनता है जाल मेहनत का  तब कहीं होती है शिकार सफलता।।  धर्मेन्द्र निर्मल 9406096346

रिश्ते

 रिश्ते विश्वास की सख्त धरा पर खड़े रिश्ते इतने नाजुक  होते हैं कभी गुब्बारे से फूट पड़ते हैं सड़ी सी बात चुभो जाती है शक सुई भोथी एकदम भोथी जब. भावनाओं की नाजुक रस्सी से  बँधे रिश्ते  इतने सख्त होते हैं कभी तोड़े नहीं टूटते महाबलियों के विषम परिस्थितियोें के दौर में भी पड़ नहीं पाते दौरे मनमुटाव के. धर्मेन्द्र निर्मल 9406096346

परिभाषा

 परिभाषा परिभाषा एक ब्रम्हपाश बाँधती शब्द कडि़यों में वृहत और निर्बाध विषय और इंजेक्शन के बाद खुराक उदाहरण जैसे आत्मसमर्पण सारी समस्याओं का मगर विश्वजीत प्रेम परिभाषा से परे पग पग को धरे जैसे जगतपाल परे विज्ञान के अनुसंधानों से. धर्मेन्द्र निर्मल 9406096346